श्रीईशोपनिषद् (Sri Ishopanishad)
Author: कृष्णकृपामूर्ती श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद
Description
१०८ उपनिषदों को सारे वेदों का सार समझा जाता है और श्रीईशोपनिषद् उनमें से प्रधान है। इन अठारह प्रकाश देने वाले श्लोकों से सारे ज्ञान का अर्क प्राप्त किया जा सकता है। हजारों सालों तक आध्यात्मिक खोज के साधकों ने इन गूढ़ एवं उच्च तत्त्वज्ञान से युक्त इन उपनिषदों का सन्दर्भ लिया है। जिस प्रकार यह नाम ही सूचित करता है—उप का अर्थ है पास, नि अर्थात् नीचे और षद् का अर्थ है बैठना—इसमें मनुष्य को शिक्षा ग्रहण करने के लिए आध्यात्मिक गुरु की शरण ग्रहण करने का परामर्श दिया जाता है। कौन सी शिक्षा ग्रहण करने के लिए? इस उपनिषद् का नाम ही इसका संकेत देता है—ईश का अर्थ है “परम नियंता”। चलो हम आध्यात्मिक गुरु के पास बैठें और परम नियंता अर्थात् श्रीभगवान् के विषय में ज्ञान प्राप्त करें। यह विधि सरल है, बशर्ते कि मनुष्य प्रामाणिक गुरु से शिक्षा प्राप्त करता है। श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद का भाषांतर तथा भाष्य इस ग्रन्थ के वास्तविक उद्देश्य को प्रामाणिक रुप से प्रस्तुत करता है और आपको उपनिषदों के गहन ज्ञान की असली समझ प्राप्त करने के प्रति मार्गदर्शित करता है।
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