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खोये हुए आनन्द की पुन: प्राप्ति (Khoye Huye Aanand ki Punah Prapti)

Author: कृष्णकृपामूर्ती श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद

Description

वैदिक साहित्य ने कलियुग अर्थात् कलह तथा पाखण्ड के इस वर्तमान युग के बारे में भविष्यवाणी की है। कलियुग का अर्थ है चतुर्थ युग। वैदिक कालक्रम के अनुसार चार भिन्न प्रकार के युग होते हैं: सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। जिस प्रकार वर्ष में छह ऋतुएं या चार ऋतुएं होती हैं, उसी प्रकार ब्रह्मा के एक दिन में चार युगों के एक हजार आवर्तन होते हैं। चार युग का अर्थ है, करीब ४३,००,००० साल। यह एक बहुत लम्बी अवधि है। यह चार युगों की अवधि है।

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