पुनरागमन (Punaraagaman)
Author: कृष्णकृपामूर्ती श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद
Description
पुनर्जन्म पर प्रकाशित व्याख्याओं में सर्वोत्कृष्ट जीवन जन्म से आरम्भ नहीं होता, न ही मृत्यु के साथ समाप्त होता है। व्यक्ति जब देह को छोड़ देता है, तब वास्तव में क्या होता है? क्या वह दुसरे देह में प्रवेश करता है? क्या उसे सदैव पुनर्जन्म लेना पड़ता है? पुनर्जन्म वास्तविकता में किस प्रकार कार्य करता है? क्या हम अपने भावी जन्मों को नियन्त्रित कर सकते है? ये प्रश्न सभी प्रश्नों में सर्वाधिक गूढ़ तथा रहस्यमय है। पुनरागमन, विश्व के सबसे प्रमाणिक तथा कालातीत ज्ञान स्त्रोतों से मृत्यु के बाद के जीवन का सुस्पष्ट तथा पूर्ण उत्तर देती है।
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