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प्रभुपाद भारत के आध्यात्मिक राजदूत ( Prabhupada Bharat ke Adhyatmik Rajdoot Sankshipt Roop me (Hindi) )
Author: SATSVAR̄UPA DĀSA GOSWAMI
$2.13
Summary
“भगवान् के महान अनन्य भक्त पतित आत्माओं के प्रति दयालु होते हैं और इसलिए वे जीवात्माओं को पुन: अपने घर भगवद्धाम वापस लाने के कार्य से पूरे संसार में यात्रा करते हैं। भगवान् के ऐसे विशुद्ध भक्त पतित आत्माओं का उद्धार करने के लिए भगवान् का संदेश लेकर आते हैं और इसलिए सामान्य मनुष्य को, जो भगवान् की बहिरंगा शक्ति के प्रभाव से भ्रमित हुआ है, उनकी संगति का लाभ उठाना चाहिए।”\
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—श्रीमद्भागवतम् (3.5.3) के भक्तिवेदान्त तात्पर्य में से
Product Details
- No Of Pages: 536
- Author: SATSVAR̄UPA DĀSA GOSWAMI
- Language: Hindi
- ISBN Code: 978-93-82176-11-4
- Product Size: 21 x 12.5 x 2 (cms)
- Weight: 0.42 (Kgs)
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