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धर्म दिव्यता का मार्ग ( Dharma Divyata ka Marg )
Author: श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद
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Summary
धर्म शब्द किसी वस्तु के मूल लक्षण का निर्देश करता है। मैं कौन हूँ? मेरी सब से अधिक महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ क्या हैं? मैं उनकी परिपूर्ति कैसे कर सकता हूँ? हममें से प्रत्येक व्यक्ति का एक मूल स्वभाव होता है और यह आवश्यक है कि हम अपने मूल स्वभाव अर्थात् अपने धर्म के साथ सामंजस्य स्थापित करके रहें। ऐसा करने से हम गहन सन्तोष का अनुभव करेंगे। प्रत्येक जीव के लिए सर्वोपरि धर्म यह है कि भगवान् अर्थात् श्रीकृष्ण की प्रेममयी सेवा करना।
Product Details
- No Of Pages: 144
- Author: श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद
- Language: Hindi
- ISBN Code: ISBN : 978-81-951467-0-3
- Product Size: 18 x 12 x 0.6 (cms)
- Weight: 0.124 (Kgs)
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